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आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले ज़िंदगी से भाग कर आया हूँ मैं मुझे थाम ले

संगीत.................१२३ आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले ज़िंदगी से भाग कर आया हूँ मैं मुझे थाम ले आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले आ ज़रा संगीत.................१२३ अपनी हस्ती से खुद मैं परेशान हूँ जिसकी मंज़िल नहीं ऐसा इंसान हूँ संगीत.................१२३ अपनी हस्ती से खुद मैं परेशान हूँ जिसकी मंज़िल नहीं ऐसा इंसान हूँ मैं कहाँ था कहाँ से कहाँ आ गया क्या से क्या हो गया मैं भी हैरान हूँ आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले आ ज़रा संगीत.................१२३ बुझ गया भी तो क्या अपने दिल का दीया अब ना रोयेंगे हम रोशनी के लिये संगीत.................१२३ बुझ गया भी तो क्या अपने दिल का दीया अब ना रोयेंगे हम रोशनी के लिये दिल का शीशा जो टूटा तो ग़म क्यूँ करें दर्द काफ़ी है बस ज़िंदगी के लिये आ ज़रा मेरे हमनशीं थाम ले मुझे थाम ले आ ज़रा संगीत.................१२३ रात आती रही रात जाती रही मेरे ग़म का न लेकिन सवेरा हुआ संगीत.................१२३ रात आती रही रात जाती रही मेरे ग़म का न लेकिन सवेरा हुआ अपने अपने नसीबों की बातें हैं ये जो मिला हमको उसका बहुत...

आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने

आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे - २ आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे - २ वो मेरी आँख के तारो कहा गए ओ मेरे प्यारो ओ ओ हो ओ हो ओ आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे शोर   क्यों मचती है ये बरखा दीवानी - २ बरसा घटाओं से लाखों मन पानी मेरी तरह तुम कभी रोये हो ओ सावन के नज़ारों आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे भरी   है कलियो से हर बाग़ की डाली - २ मेरी तो झोली में दो फूल थे खली छीन लिए वो भी कहे तुमने ओ बेईमान बहारों आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे देखो   मैंने गुड्डे    की शादी है रचायी - २ मेरी प्यारी गुड़िया की बारात है आई गोरी चली बाबुल के घर से डोली ले आओ कहारों आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया ...

मैंने शायद तुम्हे पहले भी कहीं देखा है

मैंने   शायद   तुम्हें ,  पहले   भी   कहीं   देखा   है मैंने   शायद   तुम्हें , मैंने   शायद   तुम्हें ,  पहले   भी   कहीं   देखा   है मैंने   शायद   तुम्हें ,   अजनबी   सी   हो ,  मगर   गैर   नहीं   लगती   हो वहम   से   भी ,  जो   हो   नाज़ुक ,  वो   यकीं   लगती   हो हाय   ये   फूल   सा ,  चेहरा   ये   घनेरी   ज़ुल्फ़ें मेरे   शेरों   से   भी   तुम ,  मुझको   हंसीं   लगती   हो मैंने   शायद   तुम्हें , देखकर   तुमको ,  किसी   रात   की   याद   आती   है एक   ख़ामोश ,  मुलाक़ात   की   याद   आती   है जहन   में   हुस्न   की ,  ठंडक   का   असर   जागता   है आंच   देती   हुई ,  बरसात   की   याद ...