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Showing posts from 2018

छुप गए सारे नजारे ओये क्या बात हो गई

ल : छुप गये सारे नज़ारे ओये क्या बात हो गई -२ र : तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई -२ मिल गये नैना से नैना ओये क्या बात हो गई -२ ल : दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई -२ र : ( कल नहीं आना मुझे ना बुलाना के मारेगा ताना ज़माना ) -२ तेरे होंठों पे रात ये बहाना था गोरी तुझको तो आज नहीं आना था तू चली आई दुहाई ओये क्या बात हो गई -२ ल : मैने छोड़ा ज़माना तेरे साथ हो गई ओ मैने छोड़ा ज़माना तेरे साथ हो गई र : तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई ल : ( अम्बुआ की डाली पे गाये मतवाली कोयलिया काली निराली ) -२ सावन आने का कुछ मतलब होगा बादल छाने का कोई सबब होगा रिमझिम छायेँ घटायेँ ओये क्या बात हो गई -२ र : तेरी चुनरी लहराई बरसात हो गई -२ ल : दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई ल : ( छोड़ न बइयाँ पड़ूँ तेरे पइयाँ तारों की छैंयाँ में सैंयाँ ) -२ र : एक वो दिन था मिलाती न थी तू अँखियाँ एक ये दिन है तू जागे सारी-सारी रतियाँ बन गई गोरी चकोरी ओये क्या बात हो गई -२ ल : जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गई हो जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गई छुप गये सारे नज़ारे ओये क्या बात हो गई दो : दिल ने दिल को पुकारा मु...

बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा

र: बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा सलामत रहे दोस्ताना हमारा कि: बने चाहे ... र: वो ख़्वाबों के दिन वो किताबों के दिन सवालों की रातें जवाबों के दिन कई साल हमने गुज़ारे यहाँ यहीं साथ खेले हुए हम जवां हुए हम जवां था बचपन बड़ा आशिकाना हमारा सलामत रहे दोस्ताना हमारा कि: बने चाहे ... कि: ना बिछड़ेंगे मर के भी हम दोस्तों हमें दोस्ती की क़सम दोस्तो पता कोई पूछे तो कहते हैं हम के एक दूजे के दिल मे रहते हैं हम रहते हैं हम नहीं और कोई ठिकाना हमारा सलामत रहे दोस्ताना हमारा र: बने चाहे ...

बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है

बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है - 2 हवाओं रागिनी गाओ, मेरा महबूब आया है - 2 ओ लाली फूल की मेंहँदी लगा इन गोरे हाथों में उतर आ ऐ घटा काजल, लगा इन प्यारी आँखों में सितारों माँग भर जाओ मेरा महबूब आया है - 2 नज़ारों हर तरफ़ अब तान दो इक नूर की चादर बडा शर्मीला दिलबर है, चला जाये न शरमा कर ज़रा तुम दिल को बहलाओ मेरा महबूब आया है - 2 सजाई है जवाँ कलियों ने अब ये सेज उल्फ़त की इन्हें मालूम था आएगी इक दिन ऋतु मुहब्बत की फ़िज़ाओं रंग बिखराओ मेरा महबूब आया है - 2 बहारों ...

नफरत की दुनिया को छोड़ के

नफ़रत की दुनिया को छोड़ के, प्यार की दुनिया में खुश रहना मेरे यार इस झूठकी नगरी को छोड़ के, गाता जा प्यारे अमर रहे तेरा प्यार जब जानवर कोई, इनसान को मारे कहते हैं दुनिया में, वहशी उसे सारे एक जानवर की जान आज इनसानों ने ली है चुप क्यूं है संसार बस आखिरी सुन ले, ये मेल है अपना बस ख़त्म ऐ साथी, ये खेल है अपना अब याद में तेरी बीत जाएंगे रो-रो के जीवन के दिन चार

चल चल चल मेरे साथी ओ मेरे हाथी

चल चल चल मेरे साथी, ओ मेरे हाथी चल ले चल खटारा खींच के चल यार, धक्का मार बंद है मोटर कार चल यार धक्का मार चल चल चल ... फूलों सी नाज़ुक है वो, मोटर में बैठी है जो आहिस्ता आहिस्ता चल, उसको ना तकलीफ़ हो हाय हाय, खा ना जाये हाय हाय, खा ना जाये उसकी नाज़ुक कमरिया बल, चल चल चल चल ... है है ओहो हो ... खिदमत तेरी काम दे, शायद वो ईनाम दे कर उस हसीं को सलाम, आँखों से पैगाम दे पास आजा, ओ सुन राजा पास आजा, ओ सुन राजा ऐसा मौका ना जाये निकल, चल चल चल चल ... तू यारों का यार है, कितना वफ़ादार है झूठा है सारा जहाँ, सच्चा तेरा प्यार है तू पगला, ना बदला, तू पगला, ना बदला सारी दुनिया गयी है बदल, चल चल चल चल ...

आने से उसके आये बहार जाने से उसके जाये बहार

आने से उसके आये बहार, जाने से उसके जाये बहार बड़ी मस्तानी है मेरी महबूबा मेरी ज़िन्दगानी है मेरी महबूबा... गुनगुनाए ऐसे जैसे बजते हों घुंघरू कहीं पे आके पर्वतों से, जैसे गिरता हो झरना ज़मीं पे झरनो की मौज है वो, मौजों की रवानी है मेरी महबूबा आने से उसके आये बहार, जाने से उसके जाये बहार बड़ी मस्तानी है मेरी महबूबा मेरी ज़िन्दगानी है मेरी महबूबा... इस घटा को मैं तो उसकी आँखों का काजल कहूँगा इस हवा को मैं तो उसका लहराता आँचल कहूँगा हूरों की मलिका है परियों की रानी है मेरी महबूबा बीत जाते हैं दिन, कट जाती है आँखों में रातें हम ना जाने क्या क्या करते रहते हैं आपस में बातें मैं थोड़ा दीवाना, थोड़ी सी दीवानी है मेरी महबूबा आने से उसके आये बहार, जाने से उसके जाये बहार बड़ी मस्तानी है मेरी महबूबा मेरी ज़िन्दगानी है मेरी महबूबा... बन संवर के निकले आए सावन का जब जब महीना हर कोई ये समझे होगी वो कोई चंचल हसीना पूछो तो कौन है वो, रुत ये सुहानी है, मेरी महबूबा आने से उसके आये बहार, जाने से उसके जाये बहार बड़ी मस्तानी है मेरी महबूबा मेरी ज़िन्दगानी है मेरी महबूबा...

पूछे जो कोई मुझसे बहार कैसी होती है

पूछे जो कोई मुझसे बहार कैसी होती है -२ नाम तेरा ले के कह दूँ कि यार ऐसी होती है पूछे जो कोई मुझसे घटा घनघोर कैसी होती है -२ तेरे जैसी होती है और कैसी होती है पूछे जो कोई ... ग़ुस्ताख़ी मैने कभी की नहीं मैं क्या पागल हूँ नहीं जी नहीं वैसे तो मैने कभी पी नहीं पर मैं ऐसा बेख़बर भी नहीं पूछे जो कोई मुझसे शराब कैसी होती है नाम तेरा ले के कह दूँ जनाब ऐसी होती है पूछे जो कोई ... तुझको क्यूँ आई हया क्या पता ना जाने जन्नत क्या है क्या पता मुझको ये बातें भला क्या पता पूछे जो कोई मुझसे हूर कैसी होती है नाम तेरा ले के कह दूँ हुज़ूर ऐसी होती है पूछे जो कोई ...

इक बंजारा गाये जीवन के गीत सुनाये

इक बंजारा गाये जीवन के गीत सुनाये  हम सब जीने वालों को जीने की राह बताये  इक बंजारा ओ  ज़माने वालों किताबे गम मैं, ख़ुशी का कोई फ़साना ढूंढो-२ अगर जीना है ज़माने में तो, हंसी का कोई बहाना ढूंढो ओ ओ  आँखों में आंसू भी आये तो आकर मुस्काए  इक....................हम................................................... सभी का देखो नहीं होता है, नसीबा रोशन सितारों जैसा-२ सयाना वो है जी पतझर में भी, सजा ले गुलशन बहारों जैसा ओ ओ  कागज के फूलों को भी जी महका कर दिखलाये  इक....................हम...................................................