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आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने

आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे - २ आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे - २ वो मेरी आँख के तारो कहा गए ओ मेरे प्यारो ओ ओ हो ओ हो ओ आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे शोर   क्यों मचती है ये बरखा दीवानी - २ बरसा घटाओं से लाखों मन पानी मेरी तरह तुम कभी रोये हो ओ सावन के नज़ारों आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे भरी   है कलियो से हर बाग़ की डाली - २ मेरी तो झोली में दो फूल थे खली छीन लिए वो भी कहे तुमने ओ बेईमान बहारों आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे देखो   मैंने गुड्डे    की शादी है रचायी - २ मेरी प्यारी गुड़िया की बारात है आई गोरी चली बाबुल के घर से डोली ले आओ कहारों आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया रे आया रे खिलौनेवाला खेल खिलोने लेके आया ...

मैंने शायद तुम्हे पहले भी कहीं देखा है

मैंने   शायद   तुम्हें ,  पहले   भी   कहीं   देखा   है मैंने   शायद   तुम्हें , मैंने   शायद   तुम्हें ,  पहले   भी   कहीं   देखा   है मैंने   शायद   तुम्हें ,   अजनबी   सी   हो ,  मगर   गैर   नहीं   लगती   हो वहम   से   भी ,  जो   हो   नाज़ुक ,  वो   यकीं   लगती   हो हाय   ये   फूल   सा ,  चेहरा   ये   घनेरी   ज़ुल्फ़ें मेरे   शेरों   से   भी   तुम ,  मुझको   हंसीं   लगती   हो मैंने   शायद   तुम्हें , देखकर   तुमको ,  किसी   रात   की   याद   आती   है एक   ख़ामोश ,  मुलाक़ात   की   याद   आती   है जहन   में   हुस्न   की ,  ठंडक   का   असर   जागता   है आंच   देती   हुई ,  बरसात   की   याद ...

तू ही वो हसीं है तू ही वो हसीं है

तू ही वो हसीं है ,  तू ही वो हसीं है जिसकी तस्वीर , ख़्यालों में , मुद्दत से बनी है तू ही वो हसीं है ................ हो   तू ........................ जिसकी ............................................................ तू ही वो हसीं है ............... हाय   तू ....................... रूखे   रौशन पे , ज़ुल्फ़ें बिखराए हुए जैसे चंदा पे , बादल हों छाये हुये मैंने देखा तुझे ,  तो मेरा दिल मुझे यही कहने लगा   हो   मेने ................................... ढूँढे नज़रें , जिसे दिन रात कोई और नहीं है तू ही वो हसीं है ............... हाय   तू ....................... मेरी ,  आवारा तबियत को एक राहे मुस्तकिल मिल गयी अब ना , तरसूँगा , मैं राहत को मुझे ख़्वाबों की , मंज़िल मिल गयी संगेमरमर की , मूरत है , तराशी हुई मेरी आँखों को , बरसों में , तसल्ली हुई मैंने देखा तुझे ,  तो मेरा दिल मुझे यही कहने लगा   हाय   मेने ................................... ...