टूटे हुए ख़्वाबों ने हमको ये सिखाया है दिल ने, दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया है

टूटे हुए ख़्वाबों ने हमको ये सिखाया है
दिल ने, दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया है
टूटे हुए ख़्वाबों ने हमको ये सिखाया है
दिल ने, दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया है
 
हम ढूँढते हैं उनको, जो मिल के नहीं मिलते
रूठे हैं न जाने क्यों, मेहमान वो मेरे दिल के
मेहमान वो मेरे दिल के
क्या अपनी तमन्ना थी, क्या सामने आया है
दिल ने, दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया है
टूटे हुए ख़्वाबों ने हमको ये सिखाया है
 
लौट आई सदा मेरी, टकरा के सितारों से
उजड़ी हुई दुनिया के, सुनसान किनारों से
सुनसान किनारों से
पर अब ये तड़पना भी, कुछ काम न आया है
दिल ने, दिल ने जिसे पाया था, आँखों ने गँवाया है
टूटे हुए ख़्वाबों ने हमको ये सिखाया है

Comments

Popular posts from this blog

चाँद मेरा दिल चांदनी हो तुम

मैं कहीं कवि न बन जाऊँ तेरे प्यार में कविता

बोल मेरे साथिया कितना मुझसे प्यार है