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Showing posts from June, 2016

दीवाना हुआ बादल सावन की घटा छाई

रफ़ी:    ओ हो हो , ओ हो हो , आ हा हा mmmm, ये देखके दिल झूमा ,  ली प्यार ने अंगड़ाई दीवाना हुआ बादल सावन की घटा छाई ये देखके दिल झूमा ,  ली प्यार ने अंगड़ाई दीवाना हुआ बादल ऐसी तो मेरी तक़दीर न थी तुमसा जो कोई महबूब मिले ( दिल आज खुशी से पागल है) \- २ ( ऐ जानेवफ़ा तुम खूब मिले) \- २ दिल क्यूँ ना बने पागल ,  क्या तुमने अदा पाई ये देखके दिल झूमा ,  ली प्यार ने अंगड़ाई दीवाना हुआ बादल आशा: जब तुमसे नज़र टकराई सनम जज़बात का एक तूफ़ान उठा ( तिनके की तरह मैं बह निकली) \- २ ( सैलाद मेरे रोके न रुका) \- २ जीवन में मची हलचल और बजने लगी शहनाई ये देखके दिल झूमा ,  ली प्यार ने अंगड़ाई रफ़ी:    दीवाना हुआ बादल है आज नये अरमानों से ,  आबाद मेरी दिल की नगरी ( बरसों से फ़िज़ाँ का मौसम था) \- २ ( वीरान बड़ी दुनिया थी मेरी) \- २ हाथों में तेरा आँचल ,  आया जो बहार आई ये देखके दिल झूमा ,  ली प्यार ने अंगड़ाई आशा: दीवाना हुआ बादल ,  सावन कि घटा छाई ये देखके दिल झूमा ,  ली प्यार ने अंगड़...

क्या देखते हो सूरत तुम्हारी

आशा: क्या देखते हो ? रफ़ी: सूरत तुम्हारी आशा: क्या चाहते हो ? रफ़ी: चाहत तुम्हारी आशा: न हम जो कह दें ? रफ़ी: कह न सकोगी आशा: लगती नहीं ठीक नीयत तुम्हारी       क्या देखते हो ... रफ़ी : रोज़ \- रोज़ देखूँ तुझे नई \- नई लगे मुझे       तेरे अँगों में अम्रित की धारा \- २ आशा: मिलने लगे ढंग तेरे , देखे कोई रँग तेरे       तेरी बातों का अन्दाज़ प्यारा \- २ रफ़ी: शरारत से चहरा चमकने लगा क्यों आशा: ये रँग लाई है संगत तुम्हारी       क्या देखते हो ... आशा: सोचो ज़रा जान \- ए \- जिगर बीतेगी क्या तुमपे अगर       हमको जो कोई चुरा ले       तुमसे हमको जो कोई चुरा ले रफ़ी: किसीने जो तुम्हें छीना , नामुम्किन है उसका जीना       कैसे नज़र कोई डाले       तुमपे कैसे नज़र कोई डाले आशा: प्यार पे अपने इतना भरोसा रफ़ी: इतना मोहब्बत में फ़ित्रत हमारी आशा: क्या देखते हो ... ...

ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे

ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे दे दूंगी जान जुदा मत होना रे ( मैने तुझे ज़रा देर में जाना हुआ कुसूर खफ़ा मत होना रे ) - २ ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना रे ओ मेरी बाँहों से निकलके तू अगर मेरे रस्ते से हट जाएगा तो लहराके , हो बलखाके मेरा साया तेरे तन से लिपट जाएगा तुम छुड़ाओ लाख दामन छोड़ते हैं कब ये अरमां कि मैं भी साथ रहूँगी रहोगे जहाँ ओ मेरे ... ओ मियां हमसे न छिपाओ वो बनावट कि सारी अदाएं लिये कि तुम इसपे हो इतराते कि मैं पीछे हूँ सौ इल्तिज़ाएं लिये जी मैं खुश हूँ मेरे सोना झूठ है क्या , सच कहो ना कि मैं भी साथ रहूँगी रहोगे जहाँ ओ मेरे ... ओ फिर हमसे न उलझना नहीं लट और उलझन में पड़ जाएगी ओ पछताओगी कुछ ऐसे कि ये सुरखी लबों की उतर जाएगी ये सज़ा तुम भूल न जाना प्यार को ठोकर मत लगाना कि चला जाऊंगा फिर मैं न जाने कहाँ ओ मेरे ...

ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ

रफ़ी:    ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशां ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशां महफ़िल महफ़िल ऐ शमा फिरती हो कहाँ - २ आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँ वो दीवाना ढूँढती हूँ जलाकर जो छिप गया है वो परवाना ढूँढती हूँ आशा: गर्म है , सेज़ है , ये निगाहें मेरी रफ़ी:    काम आ , जायेगी सर्द , आहें मेरी आशा: तुम किसी , राह में , तो मिलोगे कहीं रफ़ी:    अरे! इश्क़ हूँ , मैं कहीं ठहरता ही नहीं आशा: मैं भी हूँ गलियों की परछाई कभी यहाँ कभी वहाँ शाम ही से कुछ हो जाता है मेरा भी जादू जवां रफ़ी:    ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ ढूँढती हैं काफ़िर आँखें किसका निशां महफ़िल महफ़िल ऐ शमा फिरती हो कहाँ - २ आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँ वो दीवाना ढूँढती हूँ जलाकर जो छिप गया है वो परवाना ढूँढती हूँ आशा: छिप रहे , है ये , क्या ढंग है आपका ? रफ़ी:    आज तो , कुछ नया , रंग है आपका आशा: है!   आज की , रात मैं , क्या से क्या हो गयी रफ़ी:    अह...

न तू ज़मीं के लिए, है न आसमां के लिए

न तू ज़मीं के लिए , है न आसमां के लिए तेरा वजूद है , अब दास्ताँ के लिए पलट के सु-ए-चमन , देखने से क्या होगा वो शाख ही ना रही , जो थी आशियाँ के लिए ना तू ज़मीं... गरज परस्त जहां में , वफ़ा तलाश न कर ये शय बनी थी किसी , दूसरे जहां के लिए तेरा वजूद...

वो हैं ज़रा खफ़ा खफ़ा

वो हैं ज़रा खफ़ा खफ़ा तो नैन यूं मिलाए हैं कि हो हो ना बोल दूं तो क्या करूँ वो हँस के यूँ बुलाए हैं कि हो हो हँस रही है चाँदनी , मचल के रो ना दूं कहीं ऐसे कोई रूठता नहीं , ये तेरा खयाल है करीब आ मेरे हंसीं , मुझको तुझसे कुछ गिला नहीं बात यूँ बनाए हैं कि ओ हो ... वो हैं ... ऐसे मत सताइये , ज़रा तरस तो खाइये दिल की धड़कन मत जगाइये , कुछ नहीं कहूंगा मैं ना अँखियां झुकाइये , सर को कन्धे से उठाइये ऐसे नींद आए है कि हम ... वो हैं ...

चाँद मेरा दिल चांदनी हो तुम

चाँद मेरा दिल चांदनी हो तुम   चाँद से है दूर चांदनी कहाँ   लौट के आना है यहीं तुमको   जा रहे हो तुम जाओ मेरी जान   वैसे तो हर कदम मिलेंगे लोग सनम   मिलेगा सच्चा प्यार मुश्किल से   हो दिल की दोस्ती खेल नहीं कोई   दिल से दिल है मिलता यार मुश्किल से   यही तो है सनम , प्यार का ठिकाना   मैं हूँ मैं हूँ मैं हूँ   चाँद मेरा दिल चांदनी हो तुम ..रु ..रु .. चाँद से है दूर चांदनी कहाँ..रु ..रु .. लौट के आना है यहीं तुमको..रु ..रु ..   जा रहे हो तुम जाओ मेरी जान   जाओ मेरी जान जाओ मेरी

तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है

तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है जहाँ भी जाऊँ ये लगता है , तेरी महफ़िल है ये आसमान ये बादल ये रास्ते ये हवा हर एक चीज़ है अपनी जगह ठिकाने पे कई दिनों से शिकायत नहीं ज़माने से ये ज़िंदगी है सफ़र तू सफ़र कि मंज़िल है , जहाँ भी ... हर एक फूल किसी याद सा महकता है तेरे खयाल से जागी हुई फ़िज़ाएं हैं ये सब्ज़ पेड़ हैं या प्यार की दुआएं हैं तू पास हो कि नहीं फिर भी तू मुकाबिल है ,  जहाँ भी ... हर एक शय है मुहब्बत के नूर से रोशन ये रोशनी जो ना हो ज़िंदगी अधूरी है राह \- ए \- वफ़ा में कोई हमसफ़र ज़रूरी है ये रास्ता कहीं तनहा कटे तो मुश्किल है , जहाँ भी ... रफ़ी: --- --- --- --- --- (first stanza same as above ...) तेरे बगैर जहाँ में कोई कमी सी थी भटक रही थी जवानी अंधेरी राहों में सुकून दिल को मिला आ के तेरी बाहों में मैं एक खोई हुई मौज हूँ तू साहिल है ,  जहाँ भी ... तेरे जमाल से रोशन है कायनात मेरी मेरी तलाश तेरी दिलकशी रहे बाकी खुदा करे की ये दीवानगी रहे बाकी तेरी वफ़ा ही मेरी हर खुशी का हासिल है , जहाँ भी ...

आज पुरानी राहों से, कोई मुझे आवाज़ न दे

आज पुरानी राहों से , कोई मुझे आवाज़ न दे दर्द में डूबे गीत न दे , गम का सिसकता साज़ न दे बीते दिनों की याद थी जिनमें , मैं वो तराने भूल चुका आज नई मंज़िल है मेरी , कल के ठिकाने भूल चुका न वो दिल न सनम , न वो दीन \- धरम अब दूर हूँ सारे गुनाहों से जीवन बदला दुनिया बदली , मन को अनोखा ज्ञान मिला आज मुझे अपने ही दिल में , एक नया इनसान मिला पहुँचा हूँ वहाँ , नहीं दूर जहाँ , भगवान की नेक निगाहों से टूट चुके सब प्यार के बंधन , आज कोई ज़ंजीर नहीं शीशा \- ए \- दिल में अरमानों की , आज कोई तस्वीर नहीं अब शाद हूँ मैं , आज़ाद हूँ मैं , कुछ काम नहीं है आहों से आज पुरानी राहों से , कोई मुझे आवाज़ न दे दर्द में डूबे गीत न दे , गम का सिसकता साज़ न दे

वादियां मेरा दामन, रास्ते मेरी बाहें

वादियां मेरा दामन , रास्ते मेरी बाहें जाओ मेरे सिवा , तुम कहाँ जाओगे वादियां मेरा दामन...             जब चुराओगे तन तुम किसी बात से शाख \- ए \- गुल छेड़ेगी मेरे हाथ से अपने ही ज़ुल्फ को और उलझाओगे वादियां मेरा दामन...             जबसे मिलने लगी तुमसे राहें मेरी चाँद सूरज बनी दो निगाहें मेरी तुम कहीं भी रहो , तुम नज़र आओगे वादियां मेरा दामन...

जनम जनम का साथ है निभाने को

जनम जनम का साथ है निभाने को सौ सौ बार मैने जनम लिये प्यार अमर है दुनिया में , प्यार कभी नहीं मरता है मौत बदन को आती है , रूह का जलवा रहता है जनम जनम का साथ है... ओ शहज़ादी सपनों की , इतनी तू हैरान ना हो मैं भी तेरा सपना हूँ , जान मुझे अंजान ना हो जनम जनम का साथ है... तू मंज़िल मैं राही हूँ , इक दिन तुझको पाऊँगा   कौन मुझे अब रोकेगा , हरदम यूँ ही आऊँगा   जनम जनम का साथ है...

रिम झिम के गीत सावन गाए, हाय

र: रिम \- झिम के गीत सावन गाए , हाय    भीगी \- भीगी रातों में ल: होंठों पे बात दिलकी आए , हाय    भीगी \- भीगी रातों में ल: तेरा मेरा पूछे नाता    बड़ी वो ये घटा घंघोर है    चुप हूँ ऐसे में कह दो कैसे    मेरा साजन नहीं तू कोई और है    के तेरा नाम , होंठों पे मेरे , तेरे...    सपने मेरी आँखों में र: रिम \- झिम के गीत सावन गाए , हाय    भीगी \- भीगी रातों में र: मेरा दिल भी है दीवाना    तेरे नैना भी हैं नादान से    कुछ न सोचा , कुछ न देखा    कुछ भी पूछा न इस अंजान से    चल पड़े साथ हम ऐसे , कैसे    बनके साथी , राहों में ( ?) र: रिम \- झिम के गीत सावन गाए , हाय    भीगी \- भीगी रातों में     बड़ी लम्बी जी की बातें    बड़ी छोटी बरखा की रात जी ल: कहना क्या है , सुनना क्या है    कहने सुनने की अब क्या बात है र/ल: बिन कहे , बिन सुने दिल ने दिलसे    कर लीं बाते...