वो हैं ज़रा खफ़ा खफ़ा
वो हैं ज़रा
खफ़ा खफ़ा
तो नैन यूं
मिलाए हैं कि हो हो
ना बोल दूं
तो क्या करूँ
वो हँस के
यूँ बुलाए हैं कि हो हो
हँस रही है चाँदनी, मचल
के रो ना दूं कहीं
ऐसे कोई
रूठता नहीं, ये तेरा खयाल है
करीब आ मेरे
हंसीं, मुझको तुझसे कुछ गिला नहीं
बात यूँ बनाए
हैं कि ओ हो ...
वो हैं ...
ऐसे मत सताइये, ज़रा
तरस तो खाइये
दिल की धड़कन
मत जगाइये, कुछ नहीं कहूंगा मैं
ना अँखियां
झुकाइये, सर को कन्धे से उठाइये
ऐसे नींद आए
है कि हम ...
वो हैं ...
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