ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ
ढूँढती हैं
काफ़िर आँखें किसका निशां
ओ हसीना
ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ
ढूँढती हैं
काफ़िर आँखें किसका निशां
महफ़िल महफ़िल
ऐ शमा फिरती हो कहाँ - २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँ
वो दीवाना
ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप
गया है
वो परवाना
ढूँढती हूँ
आशा: गर्म है, सेज़
है, ये निगाहें मेरी
रफ़ी: काम आ, जायेगी
सर्द, आहें मेरी
आशा: तुम किसी, राह
में, तो मिलोगे कहीं
रफ़ी: अरे! इश्क़ हूँ, मैं
कहीं ठहरता ही नहीं
आशा: मैं भी हूँ गलियों की परछाई
कभी यहाँ कभी
वहाँ
शाम ही से
कुछ हो जाता है
मेरा भी जादू
जवां
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ
ढूँढती हैं
काफ़िर आँखें किसका निशां
महफ़िल महफ़िल
ऐ शमा फिरती हो कहाँ - २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँ
वो दीवाना
ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप
गया है
वो परवाना
ढूँढती हूँ
आशा: छिप रहे, है
ये, क्या ढंग है आपका?
रफ़ी: आज तो, कुछ
नया, रंग है आपका
आशा: है! आज की,
रात मैं, क्या
से क्या हो गयी
रफ़ी: अह! आपकी सादगी, तो
भला हो गयी
आशा: मैं ही हूँ गलियों की परछाई
कभी यहाँ कभी
वहाँ
शाम ही से
कुछ हो जाता है
मेरा भी जादू
जवां
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ
ढूँढती हैं
काफ़िर आँखें किसका निशां
महफ़िल महफ़िल
ऐ शमा फिरती हो कहाँ - २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँ
वो दीवाना
ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप
गया है
वो परवाना
ढूँढती हूँ
आशा: ठहरिये, तो
सही, कहिये क्या नाम है
रफ़ी: मेरी बदनामियों का वफ़ा नाम है
आशा: ओहो! क़त्ल कर के चले ये वफ़ा, खूब
है
रफ़ी: है! नादां तेरी, ये
अदा, खूब है
आशा: मैं भी हूँ गलियों की परछाई
कभी यहाँ कभी
वहाँ
शाम ही से
कुछ हो जाता है
मेरा भी जादू
जवां
रफ़ी: ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली जानेजहाँ
ढूँढती हैं
काफ़िर आँखें किसका निशां
महफ़िल महफ़िल
ऐ शमा फिरती हो कहाँ - २
आशा: वो अन्जाना ढूँढती हूँ
वो दीवाना
ढूँढती हूँ
जलाकर जो छिप
गया है
वो परवाना
ढूँढती हूँ!!!
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