तेरी प्यारी प्यारी सूरत को, किसीकी नज़र ना लागे

तेरी प्यारी प्यारी सूरत को, किसीकी नज़र ना लागे
चश्म\-\-बद्दूर
मुखड़े को छुपालो आंचल में, कहीं मेरी नज़र ना लगे
चश्म\-\-बद्दूर

यूँ ना अकेले फिरा करो, सबकी नज़र से डरा करो (२)
फूल से ज्यादा नाज़ुक हो तुम चाल सम्भल कर चला करो
ज़ुल्फ़ों को गिरा लो गालों पर, मौसम की नज़र ना लगे
चश्म\-\-बद्दूर
तेरी प्यारी प्यारी...

एक झलक जो पाता है, राही वहीं रुक जाता है (२)
देखके तेरा रूप सलोना चाँद भी सर को झुकाता है
देखा न करो तुम आईना कहीं खुद की नज़र ना लगे
चश्म\-\-बद्दूर
तेरी प्यारी प्यारी...


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