तुम ने किसी की जान को जाते हुए देखा है
तुम ने किसी
की जान को जाते हुए देखा है
वो देखो
मुझसे रूठकर, मेरी जान जा रही है
क्या
जाने किस क़ुसूर की, दी
हैं मुझे सज़ाएं
दीवाना कर
रही हैं, तौबा शिकन अदाएं
ज़ुल्फ़ों में
मुँ छुपाकर, मुझको लुभा रही है
घबरा रही है ख़ुद भी, बेचैन
हो रही है
अपने ही ख़ून\-ए\-दिल
में दामन डुबो रही है
बेजान रह गए
हम, वो मुस्करा रही है
मस्ती भरी हवाओं अब जाके रोक लो तुम
तुमको मेरी
क़सम है समझा के रोक लो तुम
उसकी जुदाई
दिल पर, नश्तर चला रही है
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