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Showing posts from May, 2016

तुम ने मुझे देखा, हो कर मेहर्बां

तुम ने मुझे देखा , हो कर मेहर्बां   रुक गई ये ज़मीं , रुक गई ज़मीं   थम गया आसमां , जान \- ए \- मन जान \- ए \- जां ) \- २ तुम ने मुझे देखा ओ कहीं दर्द के सहरा में , रुकते चलते होते इन होंठों की हसरत में , तपते जलते होते मेहर्बां हो गई , ज़ुल्फ़ की बदलियाँ जान \- ए \- मन , जान \- ए \- जां तुम ने मुझे देखा ... ओ , लेकर ये हसीं जलवे , तुम भी न कहाँ पहुँचे आखिर को मेरे दिल तक , कदमों के निशां पहुँचे खत्म से हो गए रास्ते सब यहाँ जान \- ए \- मन , जान \- ए \- जां तुम ने मुझे देखा ..

दिल का भंवर करे पुकार

दिल का भंवर करे पुकार प्यार का राग सुनो ,   प्यार का राग सुनो रे फूल   तुम गुलाब का , क्या जवाब आपका , जो अदा वो बहार है आज दिल की बेकली ,   आ गई ज़बान पर , बात ये है तुमसे प्यार है दिल तुम्हीं को दिया रे , प्यार का राग सुनो रे   ... दिल का भंवर   ... चाहे   तुम मिटाना ,   पर न तुम गिराना , आँसू की तरह निगाह से प्यार कि उँचाई , इश्क़ कि गहराई , पूछ लो हमारी आह से आसमाँ छू लिया रे , प्यार का राग सुनो रे दिल का भंवर   ... इस   हसीन उतार पे हम न बैठे हार के , साया बन के साथ हम चले आज मेरे संग तो गूँजे दिल की आरज़ू , तुझसे मेरी आँख जब मिले जाने क्या कर दिया रे प्यार का राग सुनो   ... आप   का ये आँचल ,   प्यार का ये बादल , फिर हमें ज़मीं पे ले चला अब तो हाथ थाम लो ,   इक नज़र का जाम दो , इस नये सफ़र का वस्ता तुम मेरे साक़िया रे प्यार का राग सुनो रे

अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ

अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ-2 जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ मैं ने कब तुझ से ज़माने की ख़ुशी माँगी है एक हलकी सी मेरे लब ने हँसी माँगी है-2 सामने तुझ को बिठाकर तेरा दीदार करूँ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ साथ छूटे न कभी तेरा यह क़सम ले लूँ हर ख़ुशी देके तुझे तेरे सनम ग़म ले लूँ-2 हाय , मैं किस तरह से प्यार का इज़हार करूँ जी में आता है कि जी भर के तुझे प्यार करूँ अपनी आँखों में बसाकर कोई इक़रार करूँ

मैं एक राजा हूँ, तू इक रानी है

मैं एक राजा हूँ, तू इक रानी है - २ प्रेम नगर की ये इक सुंदर, प्रेम कहानी है मैं इक राजा हूँ ... क्या होती है प्रेम कहानी, ये भी तू नादान ना जानी कितनी प्यारी प्यारी तेरी, ये नादानी है मैं इक राजा हूँ ... प्रेमी भंवरे रंगरलियों के, क्या कहते हैं इन कलियों से मैं तुझको कैसे समझाऊं, तू दीवानी है मैं इक राजा हूँ ... मन मेरा इक महल हो जैसे, तू इसमें रहती है ऐसे जैसे सीप में मोती है, सागर में पानी है मैं इक राजा हूँ ...

सौ बार जनम लेंगे, सौ बार फ़ना होंगे

वफ़ा के दीप जलाए हुए निगाहों में भटक रही हो भला क्यों उदास राहों में तुम्हें ख्याल है तुम मुझसे दूर हो लेकिन मैं सामने हूँ, चली आओ मेरी धुन में सौ बार जनम लेंगे , सौ बार फ़ना होंगे ऐ जान - ए - वफ़ा फिर भी , हम तुम न जुदा होंगे क़िस्मत हमे मिलने से , रोकेगी भला कब तक इन प्यार की राहों में , भटकेगी वफ़ा कब तक क़दमों के निशाँ खुद ही , मंज़िल का पता होंगे ये कैसी उदासी है , जो हुस्न पे छाई है हम दूर नहीं तुम से , कहने को जुदाई है अरमान भरे दो दिल , फिर एक जगह होंगे सौ बार जनम लेंगे , सौ बार फ़ना होंगे ऐ जान - ए - वफ़ा फिर भी , हम तुम न जुदा होंगे

एक था गुल और एक थी बुलबुल

एक था गुल और एक थी बुलबुल-2, दोनो चमन में रहते थे है ये कहानी बिलकुल सच्ची, मेरे नाना कहते थे एक था गुल और ... बुलबुल कुछ ऐसे गाती थी, जैसे तुम बातें करती हो वो गुल ऐसे शर्माता था, जैसे मैं घबरा जाता हूँ बुलबुल को मालूम नही था, गुल ऐसे क्यों शरमाता था वो क्या जाने उसका नगमा, गुल के दिल को धड़काता था दिल के भेद ना आते लब पे, ये दिल में ही रहते थे एक था गुल और ... लेकिन आखिर दिल की बातें, ऐसे कितने दिन छुपती हैं ये वो कलियां है जो इक दिन, बस काँटे बनके चुभती हैं इक दिन जान लिया बुलबुल ने, वो गुल उसका दीवाना है तुमको पसन्द आया हो तो बोलूं, फिर आगे जो अफ़साना है इक दूजे का हो जाने पर, वो दोनो मजबूर हुए उन दोनो के प्यार के किस्से, गुलशन में मशहूर हुए साथ जियेंगे साथ मरेंगे, वो दोनो ये कहते थे एक था गुल और ... फिर इक दिन की बात सुनाऊं, इक सय्याद चमन में आया ले गये वो बुलबुल को पकड़के, और दीवाना गुल मुरझाया \- २ शायर लोग बयां करते हैं, ऐसे उनकी जुदाई की बातें गाते थे ये गीत वो दोनो, सैयां बिना नही कटती रातें \- २ मस्त बहारों का मौसम था, आँख स...

सौ साल पहले मुझे तुम से प्यार था

सौ साल पहले मुझे तुम से प्यार था आज भी है और कल भी रहेगा सदियों से तुझ से मिलने जिया बेक़रार था आज भी है और कल भी रहेगा तुम रूठा न करो मेरी जाँ मेरी जान निकल जाती है तुम हँसती रहती हो तो इक बिजली सी चमक जाती है मुझे जीते जी ओ दिलबर , तेरा इंतज़ार था आज भी है और और कल भी रहेगा सौ साल ... इस दिल के तारों में मधुर झंकर तुम्ही से है और यह हसीन जलवा यह मस्त बहार तुम्ही से है दिल तो मेरा सनम , तेरा तलबगार था आज भी है और और कल भी रेहेगा सौ साल ... इन प्यार की राहों में कहो तो अब दिल को लुटा दूँ मैं ओ चाँदी के क़दमों में धड़कते दिल को बिछा दूँ मैं तुझे मेरे जीवन पर सदा इख़्तियार था आज भी है और और कल भी रेहेगा

परदेसियों से ना अँखियां मिलाना

परदेसियों से ना अँखियां मिलाना परदेसियों को है इक दिन जाना आती है जब ये रुत मस्तानी बनती है कोई न कोई कहानी अब के बस देखे बने क्या फ़साना सच ही कहा है पंछी इनको रात को ठहरे तो उड़ जाएं दिन को आज यहाँ कल वहाँ है ठिकाना बागों में जब जब फूल खिलेंगे तब तब ये हरजाई मिलेंगे गुज़रेगा कैसे पतझड़ का ज़माना ये बाबुल का देस छुड़ाएं देस से ये परदेस बुलाएं हाय सुनें ना ये कोई बहाना हमने यही एक बार किया था एक परदेसी से प्यार किया था ऐसे जलाए दिल जैसे परवाना प्यार से अपने ये नहीं होते ये पत्थर हैं ये नहीं रोते इनके लिये ना आँसू बहाना ना ये बादल ना ये तारे ये कागज़ के फूल हैं सारे इन फूलों के बाग न लगाना हमने यही एक बार किया था एक परदेसी से प्यार किया था रो रो के कहता है दिल ये दीवाना

तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ ओ चूड़ियाँ

र :       तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ ओ चूड़ियाँ             हाथों में पहना के चूड़ियाँ             ओ तेरे हाथों में पहना के चूड़ियाँ             के मौज बंजारा ले गया             के मौज बंजारा ले गया ले गया             तेरे हाथों में ... आ :    तूने दिल तक तो मेरा ले लिया ले लिया             तूने दिल तक तो मेरा ले लिया - 2             के वो क्या बेचारा ले गया             के वो क्या बेचारा ले गया ले गया             तूने दिल तक तो ... ...

ये दिल तुम बिन, कहीं लगता नहीं, हम क्या करें

लता: ये दिल तुम बिन , कहीं लगता नहीं , हम क्या करें ये दिल तुम बिन , कहीं लगता नहीं , हम क्या करें तसव्वुर में कोई बसता नहीं , हम क्या करें तुम्ही कह दो , अब ऐ जानेवफ़ा , हम क्या करें रफ़ी: लुटे दिल में दिया जलता नहीं , हम क्या करें तुम्ही कह दो , अब ऐ जाने \- अदा , हम क्या करें लता: ये दिल तुम बिन , कहीं लगता नहीं , हम क्या करें किसी के दिल में बस के दिल को , तड़पाना नहीं अच्छा -2 निगाहों को छलकते देख के छुप जाना नहीं अच्छा , उम्मीदों के खिले गुलशन को , झुलसाना नहीं अच्छा हमें तुम बिन , कोई जंचता नहीं , हम क्या करें , तुम्ही कह दो , अब ऐ जानेवफ़ा , हम क्या करें रफ़ी: लुटे दिल में दिया जलता नहीं , हम क्या करें मुहब्बत कर तो लें लेकिन , मुहब्बत रास आये भी -2 दिलों को बोझ लगते हैं , कभी ज़ुल्फ़ों के साये भी हज़ारों ग़म हैं इस दुनिया में , अपने भी पराये भी मुहब्बत ही का ग़म तन्हा नहीं , हम क्या करें तुम्ही कह दो , अब ऐ जाने \- अदा , हम क्या करें लता: ये दिल तुम बिन , कहीं लगता नहीं , हम क्या करें बुझा दो आग दिल की , या इसे खुल कर हवा दे दो -2 ...

ढल गया दिन हो गई शाम जाने दो जाना है

आ \:   ढल गया दिन हो गई शाम जाने दो जाना है र \:     अभी \- अभी तो आई हो अभी \- अभी जाना है आ \:   ढल गया दिन ... र \:     सितम मेरे दिल पे जो ढाए क़सम लगे उसको मेरी जो जाए आ \:   ना ऐसे देखो मुझे न रोको ज़रा ये सोचो बुरा ज़माना है र \:     अभी \- अभी तो आई ... आ \:   गुज़ारी साथ हमने कई रातें न जाने कब ख़त्म होंगी तेरी बातें र \:     अभी न जाना कोई तराना कोई फ़साना अभी सुनाना है आ \:   ढल गया दिन ... र \:     बनाते हो ये रोज़ ही बहाना न जाने देगा आज तुमको ये दीवाना आ \:   माना जी माना तू है दीवाना मेरा दीवाना बड़ा सयाना है आ \:   ढल गया दिन ...