मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे
मेरे दुश्मन
तू मेरी दोस्ती को तरसे
मुझे ग़म देने
वाले तू खुशी को तरसे
तू फूल बने पतझड़ का, तुझ
पे बहार न आए कभी
मेरी ही तरह
तू तड़पे तुझको क़रार न आए कभी
जिये तू इस
तरह की ज़िंदगी को तरसे
इतना
तो असर कर जाएं मेरी
वफ़ाएं ओ बेवफ़ा
जब तुझे याद
आएं अपनी जफ़ाएं ओ बेवफ़ा
पशेमान होके
रोए, तू हंसी को तरसे
तेरे गुलशन से ज़्यादा वीरान कोई वीराना न हो
इस दुनिया
में तेरा जो अपना तो क्या, बेगाना न हो
किसी का
प्यार क्या तू बेरुख़ी को तरसे
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