गुनगुना रहे हैं भँवरे
म: आ..., (गुनगुना
रहे हैं भँवरे, खिल रही हैं कली कली -2
ल: गली गली
म: कली कली
ल: गुनगुना
रही...
mm.. aa..
ल: ज़रा देखो
सजन बेईमान भँवरा कैसे मुसकाये
म: हाय कली
यूँ शरमाये
घूँघट में
जैसे कोई छुप जाये
ल: हाय
ज़रा...
म: हाय
कली...
ल: ऋतु ऐसी
हाए कैसी ये पवन चली गली गली
गुनगुना
रही...
म: गली गली
ल: कली कली
म: गुनगुना
रही...
mm.. aa..
म: किसी को
क्या कहें हम दोनो भी हैं देखो कुछ खोये
ल: खोये हुआ
क्या ओए ओए जागे जिया में अरमान सोये
म: सोये किसी
को...
ल: खोये हुआ
क्या...
म: ऋतु ऐसी
हाए कैसी ये पवन चली गली गली
गुनगुना
रही...
ल: गली गली
म: कली कली
ल: गुनगुना
रही...
आ...
ल: सुनो पास
न आओ, कलियों के बहाने प्यार न जताओ
म: जाओ चलो
बात न बनाओ
भँवरे के
बहाने आँख न लड़ाओ
ल: जाओ सुनो
पास...
म: जाओ चलो
बात...
ल: ऋतु ऐसी
हाए कैसी ये पवन चली गली गली
गुनगुना
रही...
म: गुनगुना
रही...
ल: गली गली)
म: कली कली)
...
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