चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे, फिर भी कभी अब नाम को तेरे

चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे, फिर भी कभी अब नाम को तेरे
आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा

देख मुझे सब है पता, सुनता है तू मन की सदा  
मितवा ...
मेरे यार तुझको बार बार, आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा
चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे

दर्द भी तू चैन भी तू, दरस भी तू नैन भी तू
मितवा ...
मेरे यार तुझको बार बार, आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा
चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे, फिर भी कभी अब नाम को तेरे
आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा



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