अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा
लता : अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा
(रफ़ी: अजी हमसे बचकर कहाँ जाइयेगा)
जहाँ जाइयेगा
हमें पाइयेगा
निगाहों में छुपकर दिखाओ तो जानें
ख़यालों में
भी तुम न आओ तो जानें
अजी लाख परदे
में छुप जाइयेगा
नज़र आइयेगा
नज़र आइयेगा
जो दिल में हैं होठों पे लाना भी मुश्किल
मगर उसको दिल
में छुपाना भी मुश्किल
नज़र की ज़ुबाँ
को समझ जाइयेगा
समझ कर ज़रा
गौर फ़रमाइयेगा
ये कैसा नशा हैं ये कैसा असर हैं
न काबू में
दिल हैं न बस में जिगर हैं
ज़रा होश आ ले
फिर जाइयेगा
ठहर जाइयेगा
ठहर जाइयेगा
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