नसीब में जिसके जो लिखा था
नसीब में
जिसके जो लिखा था
वो तेरी
महफ़िल में काम आया
किसी के
हिस्से में प्यास आई
किसी के
हिस्से में जाम आया
मैं
इक फ़साना हूँ बेकसी
का
ये हाल है
मेरी ज़िंदगी का
न हुस्न ही
मुझको रास आया
न इश्क़ ही
मेरे काम आया
नसीब में ...
बदल गईं तेरी मंज़िलें भी
बिछड़ गया मैं
भी कारवां से
तेरी मुहब्बत
के रास्ते में
न जाने ये
क्या मकाम आया
नसीब में ...
तुझे भुलाने कि कोशिशें भी
तमाम नाकाम
हो गई हैं
किसी ने
ज़िक्र-ए-वफ़ा किया जब
ज़ुबाँ पे
तेरा ही नाम आया
नसीब में ...
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