ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना
ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना
( बस इतनी शिकायत है )-2
समझा हमें
बेगाना ( बस इतनी शिकायत है )-2
ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना
...
हर राह पर
टकराए हर मोड़ पर घबराए -2
मुँह फेर
लिया तुमने हम जब भी नज़र आए-2
हो हमको नहीं
पहचाना ( बस इतनी शिकायत है-2)
ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना
...
हो जाते हो
बरहम भी बन जाते हो हमदम भी
ऐ साक़ी-ए-मैख़ाना
शोला भी हो शबनम भी -२
हो खाली मेरा
पैमाना ( बस इतनी शिकायत है-2)
ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना
...
हर रंग क़यामत
है हर ढंग शरारत है
दिल तोड़ के
चल देना ये हुस्न की आदत है-2)
हाय आता नहीं
बहलाना ( बस इतनी शिकायत है-2)
ऐ नर्गिस-ए-मस्ताना
...
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